(बाल कविता )
मेरा एक संसार है माँ
जो लगता मुझको प्यारा
इंद्रधनुष के रंग सजे हैं
दुनियाभर से न्यारा
अक्षर मुझको नहीं लुभाते
सात रंग लगें प्यारे
चिड़िया, चंदा, फूल बना लूं
नाचें मोर कभी न्यारे
तितली रानी, भंवरे भैया
मुझ संग सारे खेलें
रंग-बिरंगी दुनिया है ये
हम सबसे अलबेले
नदिया मेरी बहती है यूं
ज्यूं झरता प्रेम का झरना
अपनी धुन में रहता हूं मैं
आपस में क्यों लङना
सारे रंग सजा कर देखो
सतरंगी जीवन बन जाता
मेरा एक संसार है माँ
जो लगता मुझको प्यारा
इंद्रधनुष के रंग सजे हैं
दुनियाभर से न्यारा
अक्षर मुझको नहीं लुभाते
सात रंग लगें प्यारे
चिड़िया, चंदा, फूल बना लूं
नाचें मोर कभी न्यारे
रंग मेरे संग चलते हैं
मेरी मानें, मन की जाने
रंग मेरे संग ढलते हैं
तितली रानी, भंवरे भैया
मुझ संग सारे खेलें
रंग-बिरंगी दुनिया है ये
हम सबसे अलबेले
नदिया मेरी बहती है यूं
ज्यूं झरता प्रेम का झरना
अपनी धुन में रहता हूं मैं
सारे रंग सजा कर देखो
सतरंगी जीवन बन जाता
मन की मानूं और उकेरूं
कितना सुंदर रंग भर जाता

96 comments:
बहुत प्यारी रचना
बहुत ही सुंदर रचना|
सुंदर कविता द्वारा समझाया है ! अच्छी लगी !
मन है मेरा कोरा कागज
जैसे चाहूँ चित्र बनाऊं
फूल-पौधे पशु-पक्षी बनाऊं
हरी-भरी धरती पर,
महका-महका एक उपवन बनाऊं !
loved it
जो लगता मुझको प्यारा
इंद्रधनुष के रंग सजे हैं
दुनियाभर से न्यारा
......
चैतन्य को अभी इस संसार में जीने दीजिये ...
( पर बेटा चैतन्य थोड़ा थोड़ा अक्षर ज्ञान भी )
मम्मा की जुबानी बहुत प्यारी लगी..... :):)
एक माँ के लिए ,बच्चों की खुशियों के आगे ,कुछ भी नहीं होता.... !!
बच्चों का यह संसार दुनिया के सारे तनावों से मुक्त होता है....
मुझ संग सारे खेलें
रंग-बिरंगी दुनिया है ये
हम सबसे अलबेले
बेहद सुन्दर बाल मन की सहज सरल अभिव्यक्ति .
बहुत सुंदर रचना ...
अगर हाँ तो वाह......शाबाश कहिये उसे हमारी और से .....बहुत अच्छी हैं ।
सतरंगी जीवन बन जाता
मन की मानूं और उकेरूं
कितना सुंदर रंग भर जाता
बहुत प्यारी रचना.
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
राजा रानी नाना नानी।
सादर
सात रंग लगें प्यारे,
चिड़िया, चंदा, फूल बना लूं
नाचें मोर कभी न्यारे.
मनभावन पंक्तियाँ - आभार .
चैतन्य को असीम स्नेह और आशीर्वाद!
मुझ संग सारे खेलें
रंग-बिरंगी दुनिया है ये
हम सबसे अलबेले..
बहुत प्यारी रचना हमारे प्रिय चैतन्य की तूलिका और कलम यों ही सजती रहें और हम सब इन के दोस्त बने रहें आखिर हम भी तो भ्रमर हैं न ..
कितने गंभीर हो चित्र बना रहे
मोनिका जी जय श्री राधे ...सुन्दर कृति
भ्रमर ५
ज्यूं झरता प्रेम का झरना
अपनी धुन में रहता हूं मैं
आपस में क्यों लङना
बाल मन की भावनाएं आपके शब्दों के स्पर्श से कितनी उजली लग रही हैं !!
नदिया मेरी बहती है यूं
ज्यूं झरता प्रेम का झरना
कोमल सी प्रस्तुति..
_____________
'पाखी की दुनिया' में जरुर मिलिएगा 'अपूर्वा' से..
काश....कह सकता तुझे मैं माँ .....
MY NEW POST ...कामयाबी...
सात रंग लगें प्यारे
चिड़िया, चंदा, फूल बना लूं
नाचें मोर कभी न्यारे
बच्चा निसर्ग तय : प्रकृति प्रेमी होता है शब्दों का लिहाफ हम उसे कम उम्र में ही ज़बरी पहना देते हैं .काश संरक्षात्मक शिक्षा स्ट्रक्चरल एज्युकेशन का मर्म हमारे शिक्षा सारथी समझ पाते .
सतरंगी जीवन बन जाता
मन की मानूं और उकेरूं
कितना सुंदर रंग भर जाता
bahut hi sundar
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।
नन्हे मुन्ने की अनुपम उड़ान.
आभार,मोनिका जी.
god bless !!
सतरंगी जीवन बन जाता
मन की मानूं और उकेरूं
कितना सुंदर रंग भर जाता
ati sunder bhav bete ne tasvir bhi bahut sunder banai hai shabash beta
rachana
नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2)
नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2)
ज्यूं झरता प्रेम का झरना
अपनी धुन में रहता हूं मैं
आपस में क्यों लङना
bahut hi sundar rachana monika ji badhai.
MY NEW POST ...सम्बोधन...
नाचें मोर कभी न्यारे
बहुत ही सुंदर रचना....!!
चैतन्य के बनाए चित्र भी बहुत सुन्दर है....
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